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शनिवार, 14 मार्च 2020

कोरोना वायरस के संभावित खतरे को लेकर उत्तराखण्ड सरकार ने दिए सख्त निर्देश। बच्चों के साथ ही अध्यापक भी नही रहेंगे 31 मार्च तक स्कूलों में उपस्थित।


कोरोना वायरस के संक्रमण के संभावित खतरे और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  उत्तराखंड सरकार ने राज्य के अंतर्गत संचालित सभी प्राइवेट स्कूलों के संचालकों के लिए निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों में केवल कक्षा 9 और 11 वीं की गृह परीक्षाओं की अनुमति दी है जबकि कक्षा आठ तक के छात्रों को पूर्व के मूल्यांकन के आधार पर प्रोन्नत करने के निर्देश दिए है। इस दौरान निजी स्कूलों में अध्यापकों को भी  उपस्थित न रखने के निर्देश दिए गए हैं।
   
    शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने निदेशक माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा को जारी आदेश में कहा है कि कोरोना वायरस का विश्वभर में प्रकोप फैलरहा है तथा इसके संभावित खतरे को देखते हुए राज्य के अंतर्गत संचालित समस्त प्राइवेट स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाय। उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशों पर 13 मार्च से 31 मार्च तक राज्य के अभी शासकीय और निजी विद्यलयो को बंद रखने के निर्देश कल शिक्षा सचिव द्वारा जारी किए  जा चुके है। किन्तु गृह परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। शिक्षा सचिव ने निजी स्कूलों में कक्षा 9 और 11 वीं की गृह परीक्षाएं आयोजित  करवाने  की अनुमति देते हुए कक्षा 8 तक पूर्व में किये गए मूल्यांकन के आधार पर छात्र छात्राओं को प्रोन्नत करने के निर्देश दिए हैं। सचिव ने कहा है कि कतिपय प्राइवेट स्कूल संचालक कक्षाएं संचालित ना होने के बावजूद भी अध्यापकों को विद्यालयों में उपस्थित रहने के लिए कर रहे हैं  जो कि उचित नही है। उन्होंने कहा है कि अध्यापकों अध्यापिकाओं को विद्यालय में उपस्थित न रखा जाए। आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की आवासीय व्यवस्था पूर्वक संचालित रखने के साथ ही निर्देश दिया गया है कि विद्यालयों में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रखा जाए और बाहर जाने वाले बच्चों को सैनिटाइजर और मास्क आदि प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। हालांकि इन विद्यालयों में भी दिन में कक्षाओं का संचालन पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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