राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप जूम के इस्तेमाल को लेकर साइबर जोखिम के बारे में चेतावनी जारी की है। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में बड़ी संख्या में लोग घर से काम कर रहे हैं। वे इस एप का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों में इस app को सुरक्षित नही माना है।
एजेंसी ने ऑपरेटर और उपयोगकर्ताओं, दोनों के लिए सुरक्षा उपायों को बताते हुए एडवाइजरी जारी की है। साइबर हमलों से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-आईएन) ने कहा कि डिजिटल एप्लिकेशन का सुरक्षा उपायों के बिना उपयोग साइबर हमलों की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है। इससे साइबर अपराधियों द्वारा कार्यालय की संवेदनशील सूचनाओं को लीक किए जाने का खतरा भी बना रहता है। जूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, सिस्को वेबएक्स जैसे ऑनलाइन संचार मंचों का वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठकों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन ऑनलाइन मंच (जूम) का असुरक्षित उपयोग साइबर अपराधियों को महत्वपूर्ण सूचनाओं और वार्तालाप जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की अनुमति दे सकता है।
कोरोनावायरस के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। वर्क फ्रॉम होम और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है। ज्यादातर कंपनियों के लोग घर से काम कर रहे हैं। ऐसे में मीटिंग और संवाद बनाए रखने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी ही एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप जूम जिसे काफी पसंद किया जा रहा है, इसमें एक साथ 100 लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सकते हैं। लेकिन अब इस ऐप पर यूजर्स का पर्सनल डेटा चोरी कर फेसबुक समेत अन्य कंपनियों से अवैध तरीके से साझा करने के आरोप लग रहे हैं। सोमवार को कैलिफोर्निया की अदालत में जूम के खिलाफ मुकदमा दायर किया। अदालत में सुनवाई के दौरान कंपनी यह बताने में विफल रही कि बिना इजाजत यूजर्स के डेटा को फेसबुक और अन्य कंपनियों के साथ क्या साझा किया गया।
क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है
टेकक्रंच वेबसाइट की एक रिपोर्ट में इंटरसेप्ट का हवाला देकर बताया गया है कि इसके वीडियो कॉल एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड नहीं है, यानी बीच में ही प्राइवेसी लीक हो सकती है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जूम क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है। प्राइवेसी लीकिंग के डर से एपल को अपने लाखों मैक कंप्यूटर्स को सुरक्षित करने के लिए इंतजाम करना पड़ा था। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यह ऐप एडमिनिस्ट्रेटर्स को लोगों की गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति देता है। जूम पर यह भी आरोप लगा कि यह चुपचाप यूजर्स की आदतों के बारे में फेसबुक को डेटा भेज रहा है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक यह आईओएस एंड्रॉयड खोलने पर फेसबुक को नोटिफाई करता है। इस तरह फेसबुक तक डेटा लीक हो जाता है। इस आरोप के बाद जूम के फाउंडर ने ये कहा है कि उस फीचर को कंपनी रिव्यू कर रही है जो यूजर का डेटा फेसबुक के साथ शेयर कर रहा है। हालांकि अब कंपनी ने फेसबुक के साथ डेटा शेयर वाले इस फीचर को हटा दिया है।
क्या है जूम
जूम एक फ्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप है। इसके जरिए यूजर एक बार में अधिकतम 50 लोगों के साथ बात कर सकते हैं। ऐप का यूजर इंटरफेस आसान है जिस वजह से हर आदमी इसे यूज कर लेता है। ऐप में वन-टू-वन मीटिंग और 40 मिनट की ग्रुप कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। यह आईओएस और गूगल प्ले स्टोर दोनों प्लेटफॉर्म है।


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