Snowfall

बुधवार, 29 जुलाई 2020

गौरव सकलानी बना हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा का टॉपर, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी ने फिर लहराया परचम, मैरिट में पाँच विद्यार्थियों ने प्राप्त किया स्थान।

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद का 10वीं और 12वीं का परीक्षा आज जारी होगया। हाईस्कूल में 98.20 फीसद अंकों के साथ टिहरी के गौरव सकलानी  व इंटर में 96.60 फीसद अंकों के साथ ऊधमसिंह नगर की ब्यूटी वत्सल टॉपर रही। गौरव ने 500 में से 491 व ब्यूटी ने 483 अंक प्राप्त किये। इंटर का परीक्षाफल इस बार 80.26 व हाईस्कूल का 76.91 फीसद रहा।
 सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी के गौरव सकलानी ने हाईस्कूल में 98.20 फीसदी अंक हासिल कर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। गौरव की इस सफलता पर स्वस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में हर्ष और उल्लास का माहौल व्याप्त है। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने आचार्यजनों और माता पिता को देते हुए भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़कर देशसेवा की इच्छा व्यक्त की है। उसके साथ ही सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी से हाईस्कूल में छठे स्थान पर पवन रतूड़ी, सोलहवें स्थान पर गौरव सिंह, तेईसवें स्थान पर रुचिता भट्ट तथा इंटरमीडिएट की राज्य मैरिट सूची में शोभित जैन ने  तेईसवें स्थान पर जगह बनाई है। हाईस्कूल के चार तथा इंटरमीडिएट के एक परीक्षार्थी द्वारा राज्य मैरिट सूची में स्थान प्राप्त करने के साथ ही हाईस्कूल में राज्य का टॉपर इस विद्यालय से निकलने पर दिनभर विद्यालय में उत्सव का माहौल बना रहा। प्रधानाचार्य देवी प्रसाद नौटियाल ने मैरिट सूची में स्थान बनाने वाले विद्यार्थियों और उनके माता पिता को बधाई दी है।
      सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज गत कई वर्षों से बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। गतवर्ष भी इस विद्यालय से कई बच्चों ने मैरिट में स्थान बनाया था। उत्कृष्ट परीक्षाफल को लेकर टिहरी के विधायक धन सिंह नेगी, मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल, पालिकाध्यक्ष सीमा कृशाली, व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेश ड्यूडी, भाजपा नेता दिनेश डोभाल सहित अनेक लोगों ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को बधाई दी हैं।
     राज्य में इस बार हाईस्कूल में 1,47,155 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी थी, जिसमें से 1,13,191 उत्तीर्ण हुए हैं। गत वर्ष की तुलना में इस बार परीक्षाफल 0.48 फीसद अधिक रहा। वहीं, इंटर बोर्ड परीक्षा में 1,19,164 छात्र-छात्राओं में से 95,645 परीक्षार्थी पास हुए हैं। इंटर का रिजल्ट पिछले साल की तुलना में 0.13 फीसद अधिक रहा।

गुरुवार, 16 जुलाई 2020

हरेला पर्व पर विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में हुआ वृक्षारोपण, विद्या भारती के प्रांत संगठन मंत्री भुवन पंत ने हरेला को बताया पहाड़ की संस्कृति का संवाहक।

    हरेला पर्व पर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में एनएसएस इकाई, एचडीएफसी बैंक और टिहरी डैम वन प्रभाग के सयुक्त तत्वावधान में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में अनार के पौधे का रोपण करते हुए विद्या भारती उत्तराखंड के प्रांत संगठन मंत्री भुवन चंद्र भट्ट ने कहा है कि हरेला पर्व उत्तराखंड की अनूठी संस्कृति, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण के साथ ही रोपे गए पौधों को संरक्षण दिया जाना भी नितांत आवश्यक है।
 हरेला पर्व के अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में विद्यालय की एनएसएस इकाई से जुड़े विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ ही एचडीएफसी बैंक और टिहरी डैम वन प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में विद्यालय परिसर और आसपास वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अनेक फलदार, छायादार और औषदीय महत्व के पौधे रोपे गए। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विद्या भारती उत्तराखंड प्रान्त के संगठन मंत्री भुवन चन्द्र भट्ट ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की शानदार संस्कृति, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण के संरक्षण का संवाहक पर्व है। यह पर्व जहां हमारे लोक संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति लगाव का प्रतीक है वंही यह हमें प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी प्रेरित करता है। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के प्रत्येक छात्र-छात्रा और शिक्षकों से एक-एक पौधा लगाने और उसे संरक्षित रखने की अपील की है।
   इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य देवी प्रसाद नौटियाल ने टिहरी डैम वन प्रभाग और एचडीएफसी बैंक का विद्यालय में हरेला पर्व के आयोजन को सफल बनाने पर आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय में रोपे गए सभी पौधों को संरक्षित रखने को लेकर आस्वस्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में लगाए गए विभिन्न प्रजाति के पौधों के रखरखाव व संरक्षित करने का दायित्व विद्यालय के विभिन्न सदनों के विद्यार्थियों व शिक्षको को दिया जाएगा। वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का भी सभी ने संकल्प लिया।
      इस अवसर पर वन क्षेत्राधिकारी शेखर सिंह राणा, उप क्षेत्राधिकारी बीरेंद्र सिंह रौथाण, वन दरोगा रमेश चन्द्र, एचडीएफसी बैंक प्रबंधक सौरभ रमोला, बैंककर्मी आलोक रतूड़ी, एनएसएस इकाई से जुड़े राजेन्द्र मिश्रवान, दिनेश चंद्र बहुगुणा, मनोज सकलानी, रमेश रतूड़ी, मयंक भट्ट, रेखा डोभाल ,कुसुम भट्ट और रेखा भट्ट सहित कई एनएसएस स्वयंसेवी छात्र छात्राएं मौजूद थे।

बुधवार, 8 जुलाई 2020

शिक्षकों को 31 जुलाई तक न बुलाया जाय स्कूल, घरो से ही करवाया जाए ऑनलाइन शिक्षण। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सचिव ने राज्यों को भेजा पत्र।

 
मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर 31 जुलाई तक स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को बंद रखने और शिक्षकों को स्कूल बुलाने के बजाय घर से काम करने के लिए कहा है। पत्र में सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों से 50% तक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को "तत्काल प्रशासनिक कार्य" के लिए स्कूल बुलाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए भी कहा गया है।
    स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की सचिव अनीता करवाल  द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि "गृह मंत्रालय ने अनलॉक 2 पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत यह निर्देश दिया गया है कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान 31 जुलाई, 2020 तक बंद रहेंगे और ऑनलाइन / दूरस्थ शिक्षा की अनुमति जारी रहेगी और इसे प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों से घरों से ही ऑनलाइन शिक्षण जारी रखा जाय तथा उन्हें स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षिक संस्थानों में नहीं बुलाया जाय। पत्र में करवाल ने सभी राज्यों  के  शिक्षा विभाग से अनुरोध किया कि वह स्कूलों और कॉलेजों के बंद रखने के आदेशों का अनुपालन और कड़ाई से कार्यान्वयन सुनिश्चित करे और सभी संबंधित अधिकारियों को उनके सख्त कार्यान्वयन के लिए निर्देशित करे। 

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए ऑनलाइन प्रवेश हुए आरम्भ, यहाँ करें ऑनलाइन आवेदन

कोरोना वायरस के कारण  लॉकडाउन के बीच सत्र 2020-21 के लिए सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में ऑनलाइन प्रवेश की प्रकिया शुरू कर दी गयी है। उत्तराखंड में 15 मई तक स्कूल बंद रहने वाले हैं, ऐसे में हर साल जहां अप्रैल से नए सेशन के तहत कक्षाओं की शुरुआत हो जाती थी और नए छात्र भी प्रवेश ले लेते थे वहीँ इस बार स्थिति कुछ अलग है. लॉकडाउन के चलते शैक्षिक सत्र पिछड़ने की संभावना को देखते हुए विद्यालय स्तर पर ऑनलाइन क्लासेज के साथ ही अब ऑनलाइन प्रवेश आरम्भ किये गए हैं.
    प्रधानाचार्य देवी प्रसाद नौटियाल ने कहाँ है कि लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिसके माध्यम से बहुत सरल ढंग से विद्यार्थी व अभिभावक आवेदन कर सकते हैं. इसमें अभी फीस प्रोसेस का प्रावधान नहीं किया गया है, स्कूल खुलने के बाद ही नए एडमिशन के तहत फीस ली जायेगी. उन्होंने कहा है के विद्यालय में अध्ययनरत सभी छात्रों को ई कक्षाओं में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों व छात्र छात्राओं से ई क्लासेज में गंभीरता से प्रतिभाग करने की अपील की है.
ऐसे करें ऑनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन.
   सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में ऑनलाइन प्रवेश की प्रकिया शुरू कर दी गयी आगे है। अभिभावक और छात्र छात्राएं बेहद सरल तरीके से ऑनलाइन आवेदन के प्रक्रिया को संपन्न कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन का विकल्प वेबपेज "हिमतरंगिनी" के सभी पृष्ठों के दाहिनी और दिए स्तम्भ में मौजूद है. प्रवेश चाहने वाले अभिभावक और छात्र छात्राएं मांगी गयी सूचनाएं इस फॉर्म में भरकर Submit कर आवेदन कर सकते हैं. शार्थी प्रवेश के लिए केवल एक बार ही आवेदन करें और ऑनलाइन एडमिशन फॉर्म पर सही सूचनाएं अंकित करें.

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

Tata Sky और Airtel DTH पर निःशुल्क होगा 3 स्वंय प्रभा शैक्षिक चैनलों का प्रसारण। लॉकडाउन में स्कूली बच्चों को मिलेगा लाभ।

     लॉकडाउन के कारण स्कूली बच्चों की जहां बोर्ड परीक्षाएं बाधित हुई हैं वहीं उनकी पढ़ाई पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसके लिए भी उपाय किए हैं। लॉकडाउन के दौरान अब Tata Sky और Airtel DTH मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे 3 शैक्षिक स्वंयप्रभा चैनलों को प्रसारित करेंगे। मंत्रालय की ओर से यह घोषणा की गई है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने Tata Sky और Airtel DTH ऑपरेटरों से अपील की थी कि वे घर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें और अधिक से अधिक छात्रों तक इन चैनलों की पहुंच बढ़ाएं।
     केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण उत्पन्ना हुई इस कठिन परिस्थिति में भी छात्र घर से ही अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। अब देश भर में कहीं भी कोई छात्र निशुल्क के इन चैनलों के लिए डीटीएच सेवा प्रदाता से अनुरोध कर सकता है। ये चैनल पूरी तरह निशुल्क हैं उधर मानव संसाधन मंत्री निशंक ने बताया कि छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए Tata Sky और Airtel DTH सर्विस प्रोवाइडर से अपने डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुछ स्वयंप्रभा चैनलों को प्रसारित करने का आग्रह किया गया था जिस पर वे सहमत हो गए हैं।
     उल्लेखनीय है कि स्वयंप्रभा 32 चैनलों का एक समूह है, जो देश भर के सभी शिक्षकों, छात्रों और नागरिकों को कला, विज्ञान, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान और मानविकी विषयों, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कृषि जैसे विविध विषयों की पाठ्यक्रम आधारित शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराता है। ये चैनल पहले केवल डीडी -डीटीएच, डिश टीवी और जियो टीवी ऐप पर उपलब्ध थे अब यह Tata Sky और Airtel DTH पर भी उपलव्ध हो सकेंगे। इन चैनलों में माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्तर के सभी विषयों की कक्षाओं का प्रसारण होता है। लॉकडाउन में सरकार का यह प्रयास विद्यार्थियों के लिए कारगर सावित हो सकता है।

Online submitted admission form's list (SVMIC New Tehri)


Online submitted admission form's list.


No Submitted At Student's name Father's Name Date of Birth Admission for class
1 Apr 25, 2020, 08:16 PM Mayank Devendra 4/5/2020 6
2 Apr 25, 2020, 08:27 PM Sahil bailwal Mastram bailwal 3/12/2006 Tenth
3 Apr 25, 2020, 08:28 PM Aishwarya Chamoli shri shanti Prasad Chamoli 2/19/2005 10th
4 Apr 25, 2020, 08:29 PM Sahil bailwal Mastram bailwal 3/12/2006 X
5 Apr 25, 2020, 08:40 PM Aishwarya chamoli shri shanti Prasad Chamoli 2/19/2005 10th
6 Apr 27, 2020, 09:07 AM  km.Suman  Vinod kumar 3/10/2010 6th
7 May 01, 2020, 01:34 PM Saksham  Rakesh Chauhan 11/2/2008 6th
8 May 03, 2020, 10:12 AM Srishti Hansraj Singh chauhan 7/18/2009 6th
9 May 03, 2020, 12:03 PM Deepika Saklani Vinod Saklani 01-01-20091 6th
10 May 08, 2020, 01:09 PM Aishwarya Chamoli shri Shanti parsad Chamoli 2/19/2005 10th
11 May 08, 2020, 01:09 PM Khushi Suni kumar 1/9/2020 6th
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रविवार, 12 अप्रैल 2020

Zoom App आप करते हैं इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी जारी कर चुकी है चेतावनी।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप जूम के इस्तेमाल को लेकर साइबर जोखिम के बारे में चेतावनी जारी की है। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में बड़ी संख्या में लोग घर से काम कर रहे हैं। वे इस एप का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों में इस app को सुरक्षित नही माना है। 
      एजेंसी ने ऑपरेटर और उपयोगकर्ताओं, दोनों के लिए सुरक्षा उपायों को बताते हुए एडवाइजरी जारी की है। साइबर हमलों से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-आईएन) ने कहा कि डिजिटल एप्लिकेशन का सुरक्षा उपायों के बिना उपयोग साइबर हमलों की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है। इससे साइबर अपराधियों द्वारा कार्यालय की संवेदनशील सूचनाओं को लीक किए जाने का खतरा भी बना रहता है। जूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, सिस्को वेबएक्स जैसे ऑनलाइन संचार मंचों का वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठकों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन ऑनलाइन मंच (जूम) का असुरक्षित उपयोग साइबर अपराधियों को महत्वपूर्ण सूचनाओं और वार्तालाप जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की अनुमति दे सकता है।
कोरोनावायरस के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। वर्क फ्रॉम होम और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है। ज्यादातर कंपनियों के लोग घर से काम कर रहे हैं। ऐसे में मीटिंग और संवाद बनाए रखने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी ही एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप जूम जिसे काफी पसंद किया जा रहा है, इसमें एक साथ 100 लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सकते हैं। लेकिन अब इस ऐप पर यूजर्स का पर्सनल डेटा चोरी कर फेसबुक समेत अन्य कंपनियों से अवैध तरीके से साझा करने के आरोप लग रहे हैं। सोमवार को कैलिफोर्निया की अदालत में जूम के खिलाफ मुकदमा दायर किया। अदालत में सुनवाई के दौरान कंपनी यह बताने में विफल रही कि बिना इजाजत यूजर्स के डेटा को फेसबुक और अन्य कंपनियों के साथ क्या साझा किया गया।
      क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है
टेकक्रंच वेबसाइट की एक रिपोर्ट में इंटरसेप्ट का हवाला देकर बताया गया है कि इसके वीडियो कॉल एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड नहीं है, यानी बीच में ही प्राइवेसी लीक हो सकती है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जूम क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है। प्राइवेसी लीकिंग के डर से एपल को अपने लाखों मैक कंप्यूटर्स को सुरक्षित करने के लिए इंतजाम करना पड़ा था। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यह ऐप एडमिनिस्ट्रेटर्स को लोगों की गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति देता है। जूम पर यह भी आरोप लगा कि यह चुपचाप यूजर्स की आदतों के बारे में फेसबुक को डेटा भेज रहा है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक यह आईओएस एंड्रॉयड खोलने पर फेसबुक को नोटिफाई करता है। इस तरह फेसबुक तक डेटा लीक हो जाता है। इस आरोप के बाद जूम के फाउंडर ने ये कहा है कि उस फीचर को कंपनी रिव्यू कर रही है जो यूजर का डेटा फेसबुक के साथ शेयर कर रहा है। हालांकि अब कंपनी ने फेसबुक के साथ डेटा शेयर वाले इस फीचर को हटा दिया है।
  क्या है जूम
जूम एक फ्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप है। इसके जरिए यूजर एक बार में अधिकतम 50 लोगों के साथ बात कर सकते हैं। ऐप का यूजर इंटरफेस आसान है जिस वजह से हर आदमी इसे यूज कर लेता है। ऐप में वन-टू-वन मीटिंग और 40 मिनट की ग्रुप कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। यह आईओएस और गूगल प्ले स्टोर दोनों प्लेटफॉर्म है।

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

उत्तराखंड में 30 अप्रैल तक जारी रहेगा लॉकडाउन, 15 मई के बाद खुलेंगे शिक्षण संस्थान।

उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को यह तय कर लिया कि प्रदेश में लॉकडाउन 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार सहित अन्य अधिकारियों की बैठक में लॉकडाउन से बाहर निकलने की रूपरेखा तय करते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव जल्द भेज दिया जाएगा। केंद्र की सहमति मिलते ही यह नीति लागू हो जाएगी।
       प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार प्रदेश में शिक्षण संस्थान 15 मई के बाद ही खुलेंगे। सरकार ने कोरोना संक्रमण के फैलाव के हिसाब से जिलों को दो वर्गों में बांटा है। पहले वर्ग ए में वे जिले हैं जहां अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है या 14 अप्रैल तक कोई मामला सामने नहीं आएगा। दूसरे वर्ग बी में वे जिले हैं जहां कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं या 14 अप्रैल तक और सामने आने की आशंका है। प्रदेश सरकार की योजना हॉटस्पॉट और वर्ग बी वाले जिलों में प्रतिबंध लागू रखने और वर्ग ए वाले जिलों में कुछ हद तक ढील देने की है। इतना जरूर है कि अब सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
         सरकार ने यह किया तय
1. सभी जिलों में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन रहेगा। जिलों के दो वर्ग होंगे। ए वर्ग में वे जिले होंगे जहां 14 अप्रैल तक एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिला है। वर्ग बी में वह जिलेे होंगे जहां पॉजिटिव केस मिल चुके हैं या 14 अप्रैल तक और मिलने की आशंका है।
- ए वर्ग वाले जिलों में कुछ रियायतें दी जाएंगी।
- बी वर्ग वाले जिलों में प्रतिबंध पूरी तरह से जारी रहेगा।
2. जिलों में चिह्नित किए गए हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह का मूवमेंट पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। यहां प्रशासन राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था करेगा।
3. 30 अप्रैल तक प्रदेश में कहीं भी पांच से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध रहेेगा और धारा 144 लागू रहेगी।
4. 31 मई तक पूरे प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेंसिंग की नीति भी इसी तारीख तक लागू रहेगी।
5. भारत-नेपाल सीमा 30 अप्रैल तक सील रहेगी और राज्यों के बीच परिवहन भी गृह मंत्रालय के निर्देेशों के अधीन खुला रहेगा।
6. वर्ग बी के जिलों की सीमाएं सील रहेंगी और सामान का परिवहन भी जिलों की सीमा के अंदर नहीं होगा। वर्ग ए के जिलों में जिलाधिकारी की अनुमति से परिवहन में रियायत दी जा सकती है। वर्ग ए और वर्ग बी वाले जिलों के बीच कोई आवागमन नहीं होगा। वर्तमान में लागू पास मान्य होंगे। स्वास्थ्य परीक्षण आदि जारी रहेगा।
7. हॉटस्पॉट वाले इलाकों को छोड़कर जोखिम का आकलन कर डीएम निर्माण, औद्योगिक उत्पादन और खनन की अनुमति दे सकेंगे।
8. स्टांप एवं रजिट्रेशन की सभी जिलों में नियमों के अधीन अनुमति।
ये भी हुआ तय
9. ये रहेंगे बंद : होटल, धर्मशाला, होम स्टे, मॉल, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, जिम, रेस्टूरेंट, बार, धार्मिक संस्थान आदि बंद रहेंगे। जिलाधिकारी की अनुमति के बिना किसी कार्मिक या अन्य व्यक्ति को हटाया नहीं जाएगा।
10. हॉटस्पॉट को छोड़कर इनको रहेगी अनुुमति : खेती किसानी, बागवानी, मौन पालन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, कटाई बुवाई आदि को अनुमित रहेगी। राज्य की सीमा से बाहर और वर्ग बी वाले जिलों से श्रमिक नहीं लाए जा सकेंगे।
11. 15 मई तक प्रदेश के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।
12. अस्पतालों आदि को छोड़कर 15 मई तक प्रदेश मे एयर कंडीशनर के उपयोग पर भी रोक।
13. रियायत : वर्ग ए वाले जिलों के बीच सात बजे से लेकर एक बजे के बीच खुद के वाहनों से यात्रा हो सकेगी। वर्ग ए और वर्ग बी वाले जिलों के बीच वाहन नहीं चलेेंगे, केवल आवश्यक सामान की ढुलाई हो सकेगी।
14. वर्ग ए वाले जिलों सहित अगर कहीं कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आते हैं तो प्रतिबंध अधिक सख्त किए जाएंगे।
15. क्वारंटीन होने वालों को इधर-उधर आने-जाने की इजाजत नहीं होगी।
16. सभी निजी अस्पताल और अन्य चिकित्सीय संस्थाएं प्रदेश में खुली रहेंगी और सोशल डिस्टेंस नीति का पालन होगा।
17. सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मनरेगा को वर्ग ए जिलों में अनुमति होगी।
सार
कोरोना संक्रमण वाले जिलों में सख्ती, बाकी को कुछ हद तक छूट
सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
प्रदेश में शिक्षण संस्थान 15 मई के बाद ही खुलेंगे। साभार - अमर उजाला

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

कक्षा 10, जीव विज्ञान पाठ-6 जैव प्रक्रम से सम्बंधित उपयोगी नोट्स

कक्षा 10, जीव विज्ञान पाठ-6 जैव प्रक्रम
जैव प्रक्रम- जीवों में जीवित रहने के लिए होने वाली समस्त क्रियाओं को जैव प्रक्रम कहते हैं। जैसे-श्‍वसन।
श्‍वसन- जीवों में होने वाली ऐसी क्रिया जिसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति में गलूकोज का ऑक्सीकरण होता है। तथा कार्बन डाई ऑक्साइड, जल व ऊर्जा मुक्त होती हो श्‍वसन कहलाती है। C6H12O6 + 6CO2 + 686KCal
श्‍वसन की विशेषताएं
1. यह एक अपघटनी अभिक्रिया है।
2. श्‍वसन क्रिया में ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है। तथा कार्बन डाई ऑक्साइड मुक्त की जाती है।
3. श्‍वसन क्रिया दिन व रात अथवा चौबीसों घंटे होती है।
4. यह सभी जीवित कोशिकाओं में होती है।
5. यह माइटोकॉन्ड्रिया के सहयोग से होती है।
श्‍वसन दो प्रकार का होता है-
1. वायवीय श्‍वसन- यह श्‍वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है अत: इसे ऑक्सीश्वसन भी कहा जाता है। इस क्रिया में ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से 686Kcal ऊर्जा, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल का निर्माण होता है। यह ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। जैसे मनुष्य में।
2. अवायवीय श्‍वसन- यह श्‍वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है अत: इसे अनाॅक्सीश्वसन भी कहा जाता है। इसमें गलूकोज के आंशिक ऑक्सीकरण से 21Kcal ऊर्जा, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा एथिल एल्कोहॉल बनता है। यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य में होती है। जैसे- यीष्ट, जीवाणुओं आदि में।
श्वसन की परिभाषा क्या है , इसके प्रकार , उदाहरण और मनुष्य के श्वसन तंत्र को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें . 
पोषण- जीवों द्वारा विभिन्‍न पोषक पदार्थों जैसे - कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण, विटामिन आदि को ग्रहण करना एवं इन पोषक पदार्थों का उपयोग करना पोषण कहलाता है। पोषण दो प्रकार का होता है-
1. स्वपोषी पोषण
2. विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण
1. स्वपोषी पोषण- पोषण की वह विधि जिसमें सजीव अपना भोजन पर्यावरण में उपस्थित सरल अकार्बनिक पदार्थों से स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी पोषण कहलाता है। इन जीवों को स्वपोषी जीव कहा जाता है। जैसे- समस्त पेड़-पौधे। वह प्रक्रिया जिसमें हरे पेड़-पौधे सूर्य का प्रकाश एवं पर्णहरित की उपस्थिति में कार्बन डाई ऑक्साइड व जल ग्रहण कर ऑक्सीजन बनाते हों। प्रकाश संश्लेषण कहलाती है। यह क्रिया दिन में पर्णहरित की उपस्थिति में होती है। प्रकाश संश्लेषण के द्वारा पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसीलिए पौधों को स्वपोषी भी कहते हैं। एवं इस पोषण को स्वपोषण कहते हैं।   6CO2 + 6H2O---->C6H12O6 + 6O2
स्वपोषी पोषण के लिए निम्न परिस्थितियां आवश्यक हैं-
(1) CO2 की उपस्थिति ।
(2) जल की उपस्थिति ।
(3) सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति ।
(4) पर्णहरित की उपस्थिति ।
स्वपोषी पोषण का मुख्य उत्पाद गलूकोज तथा उपउत्पाद ऑक्सीजन होता है।
पेड़ - पौधे भोजन बनाने के लिए आवश्यक सामग्री कैसे प्राप्त करते हैं?- हम जानते हैं की पेड़-पौधों में भोजन बनाने का कार्य मुख्य रूप से पत्तियों द्वारा किया जाता है। पत्तियों में उपस्थित हरितलवक प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करते हैं। इन्हें क्लोरोप्लाष्ट भी कहते हैं। कार्बन डाई ऑक्साइड का अवशोषण पत्तियों एवं तने में उपस्थित रंध्रों द्वारा किया जाता है तथा जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण जड़ों द्वारा किया जाता है। भोजन बनने के बाद इसे पौधे के विभिन्न भागों में भेज दिया जाता है। जिसके लिए संवहन ऊतक होते हैं। CAM पादपों में रन्ध्र केवल रात्रि में खुलते हैं। इन रंध्रों से ऑक्सीजन का भी निष्कासन होता है। इसके अलावा रंध्रों से पर्याप्त मात्रा में जल की भी हानि होती है। जब प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड की आवश्यकता नहीं होती है ये रंध्रों को बन्द कर लेते हैं। रंध्रों का खुलना एवं बन्द होना द्वार कोशिका का कार्य है। द्वार कोशिका में जब जल अन्दर जाता है तो यह फूल जाती है और रन्ध्र खुल जाता है।
2. विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण-  वह पोषण जिसमें सजीव अपना भोजन स्वयं न बनाकर दूसरों पर निर्भर होते हैं विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण कहलाता है। जैसे- समस्त जन्तु परपोषी पोषण करते हैं।
अप्रकाशित क्रिया- यह क्रिया प्रकाश की अनुपस्थिति अथवा रात में पर्णहरित के स्ट्रोमा भाग में होती है। इस क्रिया में ATP खर्च होती है व कार्बन डाई ऑक्साइड का अपचयन होता है।
पेड़-पौधों में वहन पौधों में वहन निम्न दो संवहन ऊतकों द्वारा होता है- 1.जायलम 2. फ्लोएम
जायलम और फ्लोएम
1. जायलम- यह सवंहनी ऊतक मृदा से खनिज लवणों का अवशोषण कर नीचे से ऊपर पहूँचाता है।
2.फ्लोएम- यह ऊतक पत्तियों द्वारा बनाए गये भोजन को नीचे तक पहुँचाता है।
मनुष्य में ऑक्सीजन व कार्बन डाई ऑक्साइड का परिवहन- मानव में श्वसन क्रिया के लिए सहायक व मुख्य श्वसन अंग पाए जाते हैं जो निम्न हैं-
(a) सहायक श्वसन अंग-
1. बाह्य नासा छिद्र।
2. कंठ।
3. श्वसन नली।
4. नासा मार्ग
(b) मुख्य श्वसन अंग-
एक जोड़ी फेफड़े।
मनुष्य में श्वसन की क्रियाविधि:
     हमारे शरीर में वायु नासा छिद्र व नासा मार्ग से होती हुई श्वासनली में तथा श्वासनली से फेफड़ों में प्रवेश कर जाती है। नासा छिद्र में उपस्थित रोम(बाल) तथा श्लेष्मा वायु में से धूल मि्ट्टी जैसी अशुद्धियों को रोक लेते हैं। श्वसननली वक्ष गुहा में आकर दो भागों में विभक्त हो जाती है। प्रत्येक भाग अपने ओर के फेफड़े में प्रवेश कर अनेक शाखाओं में बंट जाती है। और अन्त में यह गुब्बारे के समान फूल जाती है। जिन्हें कूपिकाएं कहते हैं ये कूपिकाएं गैसों का आदान प्रदान करती हैं। यहीं से ऑक्सीजन रुधिर में है और कार्बन डाई ऑक्साइड रुधिर से हट जाती है। तथा वापस निकल जाती है।
मनुष्य में पोषण:
    मनुष्य एक परपोषी प्राणी है। मुख में भोजन जाने के बाद उसे चबाया जाता है। साथ ही लार ग्रन्थियों से निकलने वाले लालारस को मिलाया जाता है। इस लाररस की प्रकृति क्षारीय होती है। लार में उपस्थित लार एमिलेस एन्जाइम मंड के जटिल अणुओं को शर्करा में तोड़ देता है। क्षारीय प्रकृति के कारण लार अम्लीय प्रकृति के रोगाणुओं की नष्ट कर देती है। इसके बाद भोजन को आमाशय में भेज दिया जाता है। आमाशय से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन एन्जाइम, श्लेष्मा स्रावित होता है। जो भोजन में उपस्थित क्षारकीय प्रकृति के रोगाणुओं को नष्ट कर देता है।इसके बाद भोजन क्षुद्रांत्र में प्रवेश करता है। यह आहारनाल का सबसे लंबा भाग है मांसाहारी जीवों की तुलना में शाकाहारी जीवों की आहरनाल लंबी होती है। क्योंकि सेल्यूलोज पचाने के लिए अधिक लंबी आहारनाल की आवश्यकता होती है।
          क्षुद्रांत्र कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा के पाचन का स्थल होता है। यकृत से स्रावित पित्तरस रस भोजन को पुन: क्षारीय बना देता है जिस पर अग्नाश्य से निकलने वाले एन्जाइम क्रिया करते हैं। क्षुद्रांत्र में वसा की गोलिकाओं का खंडन पित्त लवण द्वारा किया जाता है। जिससे इन पर एन्जाइमों की क्रियाशीलता बढ़ जाती है।अग्नाश्य से स्रावित अग्न्याशयिक रस में ट्रिप्सिन एन्जाइम होता है। जो प्रोटीन का पाचन करता है। तथा इम्लसीकृत वसा के पाचन के लिए लाइपेज एन्जाइम होता है। क्षुद्रांत्र की भित्ती में उपस्थित ग्रंथि आंत्र रस स्रावित करती हैं इसमें उपस्थित एन्जाइम प्रोटीन को अमीनों अम्लों में, कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज़ में तथा वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लेसरोल में परिवर्तित कर देता है। इस पाचित भोजन को आंत्र के द्वारा अवशोषित किया जाता है। इसके लिए आंत्र में रोम पाये जाते हैं जो अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। इन दीर्घ रोमों से बहुत अधिक संख्या में रुधिर बहिकाएं जुडी होती हैं. जो अबशोषित भोजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाती हैं जहाँ इसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, नये उत्तकों का निर्माण करने व पुराने उत्तकों की मरम्मत करने में किया जाता है.
     यहाँ से बिन पचे भोजन को बड़ी आंत में भेज दिया जाता है जहाँ उपस्थित दीर्घरोम जल का अवशोषण कर लेते हैं और एनी पदार्थ गुदा द्वारा मल के रूप में बाहर त्याग दिया जाता जिसका नियंत्रण गुदा अवरोधनी द्वारा क्या जाता है.
अमीबा में पोषण- हमारे शरीर में वहन रुधिर द्वारा किया जाता है। रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक है। तथा रुधिर में एक तरल माध्यम होता है, जिसे प्लैज्मा कहते हैं। प्लैज्मा भोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का वहन करता है। तथा ऑक्सीजन का वहन लाल रुधिर कणिकाओं द्वारा किया जाता है। अत: इन सब के वहन के लिए एक पंपनयंत्र की आवश्यकता होती है।
हमारा पंप-हृदय- हृदय एक पेशीय अंग है। जो मुट्ठी के आकार का होता है।हमारा हृदय चार कोष्ठों में बंटा होता है। ताकि ऑक्सीजनित रुधिर विऑक्सीजनित में न मिल सके।  रुधिर को फेफड़ों में ऑक्सीजन को जोड़ना होता है। और कार्बन डाई ऑक्साइड को हटाना होता है। जब रुधिर फेफड़ों से अपने साथ ऑक्सीजन को जोड़ता है अथवा ऑक्सीजनित होता है तो यह हृदय के बायें आलिन्द में एकत्र होता है। इस दौरान यह शिथिल हो जाता है, तथा बायाँ आलिन्द संकुचित रहता है। इसके पश्चात एकत्र ऑक्सीजनित रुधिर बांयें आलिन्द से बांयें निलय मे प्रवेश करता है। इस दौरान बायाँ आलिन्द संकुचित हो जाता है तथा बायाँ निलय शिथिल हो जाता है। बांयें निलय की भित्ती मोटी होती है। जब यह संकुचित होता है तो ऑक्सीजनित रुधिर शरीर के सम्पूर्ण अंग तंत्रो तक पहुँच जाता है। इस प्रकार हमारा हृदय एक पंप की तरह कार्य करता है।
      हृदय से रुधिर जिन वाहिनियों से होते हुए विभिन्न अंग तंत्रों तक पहुँचता है, उन्हें धमनी कहते है। इनकी भित्ती भी मजबूत व लचीली होती है। क्योंकि रुधिर दाब से अधिक होने से फटने का डर होता है। विऑक्सीजनित (कार्बन डाइ ऑक्साइड युक्त रुधिर) रुधिर को विभिन्‍न अंग तंत्रो से जो रुधिर वाहिनियाँ वापस हृदय तक लाती हैं, उन्हें शिरा कहते हैं विऑक्सीजनित रुधिर विभिन्‍न अंग तंत्रों से आकर दायाँ आलिन्द में व दायाँ आलिन्द से दायाँ निलय में प्रवेश करता है। तथा दायाँ निलय से फेफड़ो में प्रवेश करता है। यहाँ से पुन: ऑक्सीजन रुधिर से जुड़ता है और वही चक्र पुन: शुरू हो जाता है। आपने देखा होगा कि विऑक्सीजनित रुधिर को ऑक्सीजनित होने के लिए दो बार हृदय से गुजरना पड़ा है। इसलिए इस तंत्र को दोहरापरिसंचरण तंत्र कहा जाता है।
प्लेटलैट्स द्वारा अनुरक्षण- प्लेटलेट्स हमारे पूरे शरीर में भ्रमण करती हैं, जब हम घायल हो जाते हैं तो रुधिर वाहिनियों के फटने से रुधिर स्राव होता है। इससे रुधिर की हानि होती है। तथा पंम्पिग दाब में कमी आती है। प्लैटलैट्स रुधिर स्रावित स्थान पर जाल बना लेती हैं। जिससे रुधिर का थक्का बन जाता है। और रूधिर का स्रावण रुक जाता है। तथा आक्रमण करने वाले रोगाणुओं को नष्ट कर अनुरक्षण का कार्य भी करती हैं। धीरे-धीरे घाव भर जाता है।
उत्सर्जन- वह जैव प्रक्रम जिसमें अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन होता है, उत्सर्जन कहलाता है।
मानव में उत्सर्जन- मानव के उत्सर्जन तंत्र में एक जोड़ी वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग होता है। वृक्क उदर में रीढ़ की हड्डी के दोनों और होते हैं। रुधिर में से छनित नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ जैसे यूरिक अम्ल वृक्क में रुधिर से अलग कर लिए जाते हैं। इसके लिए पतली परत के रुप में कोशिकाओं का गुच्छा होता है जो अपशिष्ट पदार्थों को छान लेती हैं। छनित द्रव अपशिष्ट पदार्थ वृक्क से मूत्रवाहिनी में आते हैं। जो मूत्राशय में खुलती है। यहां एकत्र होकर मूत्र मार्ग द्वारा शरीर से बाहर त्याग दिए जाते हैं।
कृत्रिम वृक्क अपोहन -उत्तरजीवित के लिए वृक्क एक महत्वपूर्ण अंग है। यह संक्रमण, आघात या वृक्क में सीमित रुधिर प्रवाह के कारण अनियंत्रित हो सकता है जिससे इसकी कार्य क्षमता में कमी आ जाती है, और शरीर में विषैले अपशिष्ट को संचित करने लग जाता है। जो मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इस स्थिति में कृत्रिम वृक्क का उपयोग कर सकते हैं। एक कृत्रिम वृक्क नाइट्रोजनी अपशिष्टों को रुधिर से अपोहन द्वारा निकलने का कार्य करता है। इस प्रकार मृत्यु से बचा जा सकता है।
वृकाणु (नेफ्रॉन)- नेफ्रॉन उत्सर्जन तंत्र की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई होती है। मनुष्य के प्रत्येक वृक्क में लगभग दस लाख अतिसूक्ष्म नलिकाएं होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। प्रत्येक नेफ्रॉन का प्रारम्भिक भाग प्याले के समान होता है। जिसे बोमेन सम्पुट कहते हैं। इस बोमेन सम्पुट के प्यालेनुमा भाग में रक्त नलिकाओं का जाल पाया जाता है। जिसे ग्लोमेरूलस कहते हैं।बोमेन सम्पुट व ग्लोमेरूलस दोनों मिलकर मैलपीगी कोश बनाते हैं। नेफ्रॉन का शेष भाग एक लंबी नलिका के रूप में होता है। वृक्क नलिकाएं आपस में संयोग करके संग्रह वाहिनियों में खुलती हैं। वृक्क की सभी संग्रह वाहिनियां अपनी ओर की मूत्रवाहिनियों में खुलती हैं। प्रत्येक मूत्र वाहिनी का अग्र भाग कीप की तरह चौड़ा होता हैं। जिसे पेल्विस कहते हैं। जबकि मूत्रवाहिनी का पिछला भाग लम्बी नलिका के रूप में होता है जो मूत्राशय में खुलता है।

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