Snowfall

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

Online submitted admission form's list (SVMIC New Tehri)


Online submitted admission form's list.


No Submitted At Student's name Father's Name Date of Birth Admission for class
1 Apr 25, 2020, 08:16 PM Mayank Devendra 4/5/2020 6
2 Apr 25, 2020, 08:27 PM Sahil bailwal Mastram bailwal 3/12/2006 Tenth
3 Apr 25, 2020, 08:28 PM Aishwarya Chamoli shri shanti Prasad Chamoli 2/19/2005 10th
4 Apr 25, 2020, 08:29 PM Sahil bailwal Mastram bailwal 3/12/2006 X
5 Apr 25, 2020, 08:40 PM Aishwarya chamoli shri shanti Prasad Chamoli 2/19/2005 10th
6 Apr 27, 2020, 09:07 AM  km.Suman  Vinod kumar 3/10/2010 6th
7 May 01, 2020, 01:34 PM Saksham  Rakesh Chauhan 11/2/2008 6th
8 May 03, 2020, 10:12 AM Srishti Hansraj Singh chauhan 7/18/2009 6th
9 May 03, 2020, 12:03 PM Deepika Saklani Vinod Saklani 01-01-20091 6th
10 May 08, 2020, 01:09 PM Aishwarya Chamoli shri Shanti parsad Chamoli 2/19/2005 10th
11 May 08, 2020, 01:09 PM Khushi Suni kumar 1/9/2020 6th
12






















रविवार, 12 अप्रैल 2020

Zoom App आप करते हैं इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी जारी कर चुकी है चेतावनी।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप जूम के इस्तेमाल को लेकर साइबर जोखिम के बारे में चेतावनी जारी की है। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में बड़ी संख्या में लोग घर से काम कर रहे हैं। वे इस एप का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों में इस app को सुरक्षित नही माना है। 
      एजेंसी ने ऑपरेटर और उपयोगकर्ताओं, दोनों के लिए सुरक्षा उपायों को बताते हुए एडवाइजरी जारी की है। साइबर हमलों से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-आईएन) ने कहा कि डिजिटल एप्लिकेशन का सुरक्षा उपायों के बिना उपयोग साइबर हमलों की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है। इससे साइबर अपराधियों द्वारा कार्यालय की संवेदनशील सूचनाओं को लीक किए जाने का खतरा भी बना रहता है। जूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, सिस्को वेबएक्स जैसे ऑनलाइन संचार मंचों का वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठकों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन ऑनलाइन मंच (जूम) का असुरक्षित उपयोग साइबर अपराधियों को महत्वपूर्ण सूचनाओं और वार्तालाप जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की अनुमति दे सकता है।
कोरोनावायरस के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। वर्क फ्रॉम होम और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है। ज्यादातर कंपनियों के लोग घर से काम कर रहे हैं। ऐसे में मीटिंग और संवाद बनाए रखने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी ही एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप जूम जिसे काफी पसंद किया जा रहा है, इसमें एक साथ 100 लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सकते हैं। लेकिन अब इस ऐप पर यूजर्स का पर्सनल डेटा चोरी कर फेसबुक समेत अन्य कंपनियों से अवैध तरीके से साझा करने के आरोप लग रहे हैं। सोमवार को कैलिफोर्निया की अदालत में जूम के खिलाफ मुकदमा दायर किया। अदालत में सुनवाई के दौरान कंपनी यह बताने में विफल रही कि बिना इजाजत यूजर्स के डेटा को फेसबुक और अन्य कंपनियों के साथ क्या साझा किया गया।
      क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है
टेकक्रंच वेबसाइट की एक रिपोर्ट में इंटरसेप्ट का हवाला देकर बताया गया है कि इसके वीडियो कॉल एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड नहीं है, यानी बीच में ही प्राइवेसी लीक हो सकती है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जूम क्लाइंट के ई-मेल एड्रेस लीक कर रहा है। प्राइवेसी लीकिंग के डर से एपल को अपने लाखों मैक कंप्यूटर्स को सुरक्षित करने के लिए इंतजाम करना पड़ा था। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यह ऐप एडमिनिस्ट्रेटर्स को लोगों की गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति देता है। जूम पर यह भी आरोप लगा कि यह चुपचाप यूजर्स की आदतों के बारे में फेसबुक को डेटा भेज रहा है। मदरबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक यह आईओएस एंड्रॉयड खोलने पर फेसबुक को नोटिफाई करता है। इस तरह फेसबुक तक डेटा लीक हो जाता है। इस आरोप के बाद जूम के फाउंडर ने ये कहा है कि उस फीचर को कंपनी रिव्यू कर रही है जो यूजर का डेटा फेसबुक के साथ शेयर कर रहा है। हालांकि अब कंपनी ने फेसबुक के साथ डेटा शेयर वाले इस फीचर को हटा दिया है।
  क्या है जूम
जूम एक फ्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप है। इसके जरिए यूजर एक बार में अधिकतम 50 लोगों के साथ बात कर सकते हैं। ऐप का यूजर इंटरफेस आसान है जिस वजह से हर आदमी इसे यूज कर लेता है। ऐप में वन-टू-वन मीटिंग और 40 मिनट की ग्रुप कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। यह आईओएस और गूगल प्ले स्टोर दोनों प्लेटफॉर्म है।

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

उत्तराखंड में 30 अप्रैल तक जारी रहेगा लॉकडाउन, 15 मई के बाद खुलेंगे शिक्षण संस्थान।

उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को यह तय कर लिया कि प्रदेश में लॉकडाउन 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार सहित अन्य अधिकारियों की बैठक में लॉकडाउन से बाहर निकलने की रूपरेखा तय करते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव जल्द भेज दिया जाएगा। केंद्र की सहमति मिलते ही यह नीति लागू हो जाएगी।
       प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार प्रदेश में शिक्षण संस्थान 15 मई के बाद ही खुलेंगे। सरकार ने कोरोना संक्रमण के फैलाव के हिसाब से जिलों को दो वर्गों में बांटा है। पहले वर्ग ए में वे जिले हैं जहां अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है या 14 अप्रैल तक कोई मामला सामने नहीं आएगा। दूसरे वर्ग बी में वे जिले हैं जहां कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं या 14 अप्रैल तक और सामने आने की आशंका है। प्रदेश सरकार की योजना हॉटस्पॉट और वर्ग बी वाले जिलों में प्रतिबंध लागू रखने और वर्ग ए वाले जिलों में कुछ हद तक ढील देने की है। इतना जरूर है कि अब सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
         सरकार ने यह किया तय
1. सभी जिलों में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन रहेगा। जिलों के दो वर्ग होंगे। ए वर्ग में वे जिले होंगे जहां 14 अप्रैल तक एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिला है। वर्ग बी में वह जिलेे होंगे जहां पॉजिटिव केस मिल चुके हैं या 14 अप्रैल तक और मिलने की आशंका है।
- ए वर्ग वाले जिलों में कुछ रियायतें दी जाएंगी।
- बी वर्ग वाले जिलों में प्रतिबंध पूरी तरह से जारी रहेगा।
2. जिलों में चिह्नित किए गए हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह का मूवमेंट पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। यहां प्रशासन राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था करेगा।
3. 30 अप्रैल तक प्रदेश में कहीं भी पांच से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध रहेेगा और धारा 144 लागू रहेगी।
4. 31 मई तक पूरे प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेंसिंग की नीति भी इसी तारीख तक लागू रहेगी।
5. भारत-नेपाल सीमा 30 अप्रैल तक सील रहेगी और राज्यों के बीच परिवहन भी गृह मंत्रालय के निर्देेशों के अधीन खुला रहेगा।
6. वर्ग बी के जिलों की सीमाएं सील रहेंगी और सामान का परिवहन भी जिलों की सीमा के अंदर नहीं होगा। वर्ग ए के जिलों में जिलाधिकारी की अनुमति से परिवहन में रियायत दी जा सकती है। वर्ग ए और वर्ग बी वाले जिलों के बीच कोई आवागमन नहीं होगा। वर्तमान में लागू पास मान्य होंगे। स्वास्थ्य परीक्षण आदि जारी रहेगा।
7. हॉटस्पॉट वाले इलाकों को छोड़कर जोखिम का आकलन कर डीएम निर्माण, औद्योगिक उत्पादन और खनन की अनुमति दे सकेंगे।
8. स्टांप एवं रजिट्रेशन की सभी जिलों में नियमों के अधीन अनुमति।
ये भी हुआ तय
9. ये रहेंगे बंद : होटल, धर्मशाला, होम स्टे, मॉल, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, जिम, रेस्टूरेंट, बार, धार्मिक संस्थान आदि बंद रहेंगे। जिलाधिकारी की अनुमति के बिना किसी कार्मिक या अन्य व्यक्ति को हटाया नहीं जाएगा।
10. हॉटस्पॉट को छोड़कर इनको रहेगी अनुुमति : खेती किसानी, बागवानी, मौन पालन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, कटाई बुवाई आदि को अनुमित रहेगी। राज्य की सीमा से बाहर और वर्ग बी वाले जिलों से श्रमिक नहीं लाए जा सकेंगे।
11. 15 मई तक प्रदेश के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।
12. अस्पतालों आदि को छोड़कर 15 मई तक प्रदेश मे एयर कंडीशनर के उपयोग पर भी रोक।
13. रियायत : वर्ग ए वाले जिलों के बीच सात बजे से लेकर एक बजे के बीच खुद के वाहनों से यात्रा हो सकेगी। वर्ग ए और वर्ग बी वाले जिलों के बीच वाहन नहीं चलेेंगे, केवल आवश्यक सामान की ढुलाई हो सकेगी।
14. वर्ग ए वाले जिलों सहित अगर कहीं कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आते हैं तो प्रतिबंध अधिक सख्त किए जाएंगे।
15. क्वारंटीन होने वालों को इधर-उधर आने-जाने की इजाजत नहीं होगी।
16. सभी निजी अस्पताल और अन्य चिकित्सीय संस्थाएं प्रदेश में खुली रहेंगी और सोशल डिस्टेंस नीति का पालन होगा।
17. सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मनरेगा को वर्ग ए जिलों में अनुमति होगी।
सार
कोरोना संक्रमण वाले जिलों में सख्ती, बाकी को कुछ हद तक छूट
सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
प्रदेश में शिक्षण संस्थान 15 मई के बाद ही खुलेंगे। साभार - अमर उजाला

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

कक्षा 10, जीव विज्ञान पाठ-6 जैव प्रक्रम से सम्बंधित उपयोगी नोट्स

कक्षा 10, जीव विज्ञान पाठ-6 जैव प्रक्रम
जैव प्रक्रम- जीवों में जीवित रहने के लिए होने वाली समस्त क्रियाओं को जैव प्रक्रम कहते हैं। जैसे-श्‍वसन।
श्‍वसन- जीवों में होने वाली ऐसी क्रिया जिसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति में गलूकोज का ऑक्सीकरण होता है। तथा कार्बन डाई ऑक्साइड, जल व ऊर्जा मुक्त होती हो श्‍वसन कहलाती है। C6H12O6 + 6CO2 + 686KCal
श्‍वसन की विशेषताएं
1. यह एक अपघटनी अभिक्रिया है।
2. श्‍वसन क्रिया में ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है। तथा कार्बन डाई ऑक्साइड मुक्त की जाती है।
3. श्‍वसन क्रिया दिन व रात अथवा चौबीसों घंटे होती है।
4. यह सभी जीवित कोशिकाओं में होती है।
5. यह माइटोकॉन्ड्रिया के सहयोग से होती है।
श्‍वसन दो प्रकार का होता है-
1. वायवीय श्‍वसन- यह श्‍वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है अत: इसे ऑक्सीश्वसन भी कहा जाता है। इस क्रिया में ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से 686Kcal ऊर्जा, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल का निर्माण होता है। यह ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। जैसे मनुष्य में।
2. अवायवीय श्‍वसन- यह श्‍वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है अत: इसे अनाॅक्सीश्वसन भी कहा जाता है। इसमें गलूकोज के आंशिक ऑक्सीकरण से 21Kcal ऊर्जा, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा एथिल एल्कोहॉल बनता है। यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य में होती है। जैसे- यीष्ट, जीवाणुओं आदि में।
श्वसन की परिभाषा क्या है , इसके प्रकार , उदाहरण और मनुष्य के श्वसन तंत्र को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें . 
पोषण- जीवों द्वारा विभिन्‍न पोषक पदार्थों जैसे - कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण, विटामिन आदि को ग्रहण करना एवं इन पोषक पदार्थों का उपयोग करना पोषण कहलाता है। पोषण दो प्रकार का होता है-
1. स्वपोषी पोषण
2. विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण
1. स्वपोषी पोषण- पोषण की वह विधि जिसमें सजीव अपना भोजन पर्यावरण में उपस्थित सरल अकार्बनिक पदार्थों से स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी पोषण कहलाता है। इन जीवों को स्वपोषी जीव कहा जाता है। जैसे- समस्त पेड़-पौधे। वह प्रक्रिया जिसमें हरे पेड़-पौधे सूर्य का प्रकाश एवं पर्णहरित की उपस्थिति में कार्बन डाई ऑक्साइड व जल ग्रहण कर ऑक्सीजन बनाते हों। प्रकाश संश्लेषण कहलाती है। यह क्रिया दिन में पर्णहरित की उपस्थिति में होती है। प्रकाश संश्लेषण के द्वारा पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसीलिए पौधों को स्वपोषी भी कहते हैं। एवं इस पोषण को स्वपोषण कहते हैं।   6CO2 + 6H2O---->C6H12O6 + 6O2
स्वपोषी पोषण के लिए निम्न परिस्थितियां आवश्यक हैं-
(1) CO2 की उपस्थिति ।
(2) जल की उपस्थिति ।
(3) सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति ।
(4) पर्णहरित की उपस्थिति ।
स्वपोषी पोषण का मुख्य उत्पाद गलूकोज तथा उपउत्पाद ऑक्सीजन होता है।
पेड़ - पौधे भोजन बनाने के लिए आवश्यक सामग्री कैसे प्राप्त करते हैं?- हम जानते हैं की पेड़-पौधों में भोजन बनाने का कार्य मुख्य रूप से पत्तियों द्वारा किया जाता है। पत्तियों में उपस्थित हरितलवक प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करते हैं। इन्हें क्लोरोप्लाष्ट भी कहते हैं। कार्बन डाई ऑक्साइड का अवशोषण पत्तियों एवं तने में उपस्थित रंध्रों द्वारा किया जाता है तथा जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण जड़ों द्वारा किया जाता है। भोजन बनने के बाद इसे पौधे के विभिन्न भागों में भेज दिया जाता है। जिसके लिए संवहन ऊतक होते हैं। CAM पादपों में रन्ध्र केवल रात्रि में खुलते हैं। इन रंध्रों से ऑक्सीजन का भी निष्कासन होता है। इसके अलावा रंध्रों से पर्याप्त मात्रा में जल की भी हानि होती है। जब प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड की आवश्यकता नहीं होती है ये रंध्रों को बन्द कर लेते हैं। रंध्रों का खुलना एवं बन्द होना द्वार कोशिका का कार्य है। द्वार कोशिका में जब जल अन्दर जाता है तो यह फूल जाती है और रन्ध्र खुल जाता है।
2. विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण-  वह पोषण जिसमें सजीव अपना भोजन स्वयं न बनाकर दूसरों पर निर्भर होते हैं विषमपोषी अथवा परपोषी पोषण कहलाता है। जैसे- समस्त जन्तु परपोषी पोषण करते हैं।
अप्रकाशित क्रिया- यह क्रिया प्रकाश की अनुपस्थिति अथवा रात में पर्णहरित के स्ट्रोमा भाग में होती है। इस क्रिया में ATP खर्च होती है व कार्बन डाई ऑक्साइड का अपचयन होता है।
पेड़-पौधों में वहन पौधों में वहन निम्न दो संवहन ऊतकों द्वारा होता है- 1.जायलम 2. फ्लोएम
जायलम और फ्लोएम
1. जायलम- यह सवंहनी ऊतक मृदा से खनिज लवणों का अवशोषण कर नीचे से ऊपर पहूँचाता है।
2.फ्लोएम- यह ऊतक पत्तियों द्वारा बनाए गये भोजन को नीचे तक पहुँचाता है।
मनुष्य में ऑक्सीजन व कार्बन डाई ऑक्साइड का परिवहन- मानव में श्वसन क्रिया के लिए सहायक व मुख्य श्वसन अंग पाए जाते हैं जो निम्न हैं-
(a) सहायक श्वसन अंग-
1. बाह्य नासा छिद्र।
2. कंठ।
3. श्वसन नली।
4. नासा मार्ग
(b) मुख्य श्वसन अंग-
एक जोड़ी फेफड़े।
मनुष्य में श्वसन की क्रियाविधि:
     हमारे शरीर में वायु नासा छिद्र व नासा मार्ग से होती हुई श्वासनली में तथा श्वासनली से फेफड़ों में प्रवेश कर जाती है। नासा छिद्र में उपस्थित रोम(बाल) तथा श्लेष्मा वायु में से धूल मि्ट्टी जैसी अशुद्धियों को रोक लेते हैं। श्वसननली वक्ष गुहा में आकर दो भागों में विभक्त हो जाती है। प्रत्येक भाग अपने ओर के फेफड़े में प्रवेश कर अनेक शाखाओं में बंट जाती है। और अन्त में यह गुब्बारे के समान फूल जाती है। जिन्हें कूपिकाएं कहते हैं ये कूपिकाएं गैसों का आदान प्रदान करती हैं। यहीं से ऑक्सीजन रुधिर में है और कार्बन डाई ऑक्साइड रुधिर से हट जाती है। तथा वापस निकल जाती है।
मनुष्य में पोषण:
    मनुष्य एक परपोषी प्राणी है। मुख में भोजन जाने के बाद उसे चबाया जाता है। साथ ही लार ग्रन्थियों से निकलने वाले लालारस को मिलाया जाता है। इस लाररस की प्रकृति क्षारीय होती है। लार में उपस्थित लार एमिलेस एन्जाइम मंड के जटिल अणुओं को शर्करा में तोड़ देता है। क्षारीय प्रकृति के कारण लार अम्लीय प्रकृति के रोगाणुओं की नष्ट कर देती है। इसके बाद भोजन को आमाशय में भेज दिया जाता है। आमाशय से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन एन्जाइम, श्लेष्मा स्रावित होता है। जो भोजन में उपस्थित क्षारकीय प्रकृति के रोगाणुओं को नष्ट कर देता है।इसके बाद भोजन क्षुद्रांत्र में प्रवेश करता है। यह आहारनाल का सबसे लंबा भाग है मांसाहारी जीवों की तुलना में शाकाहारी जीवों की आहरनाल लंबी होती है। क्योंकि सेल्यूलोज पचाने के लिए अधिक लंबी आहारनाल की आवश्यकता होती है।
          क्षुद्रांत्र कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा के पाचन का स्थल होता है। यकृत से स्रावित पित्तरस रस भोजन को पुन: क्षारीय बना देता है जिस पर अग्नाश्य से निकलने वाले एन्जाइम क्रिया करते हैं। क्षुद्रांत्र में वसा की गोलिकाओं का खंडन पित्त लवण द्वारा किया जाता है। जिससे इन पर एन्जाइमों की क्रियाशीलता बढ़ जाती है।अग्नाश्य से स्रावित अग्न्याशयिक रस में ट्रिप्सिन एन्जाइम होता है। जो प्रोटीन का पाचन करता है। तथा इम्लसीकृत वसा के पाचन के लिए लाइपेज एन्जाइम होता है। क्षुद्रांत्र की भित्ती में उपस्थित ग्रंथि आंत्र रस स्रावित करती हैं इसमें उपस्थित एन्जाइम प्रोटीन को अमीनों अम्लों में, कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज़ में तथा वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लेसरोल में परिवर्तित कर देता है। इस पाचित भोजन को आंत्र के द्वारा अवशोषित किया जाता है। इसके लिए आंत्र में रोम पाये जाते हैं जो अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। इन दीर्घ रोमों से बहुत अधिक संख्या में रुधिर बहिकाएं जुडी होती हैं. जो अबशोषित भोजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाती हैं जहाँ इसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, नये उत्तकों का निर्माण करने व पुराने उत्तकों की मरम्मत करने में किया जाता है.
     यहाँ से बिन पचे भोजन को बड़ी आंत में भेज दिया जाता है जहाँ उपस्थित दीर्घरोम जल का अवशोषण कर लेते हैं और एनी पदार्थ गुदा द्वारा मल के रूप में बाहर त्याग दिया जाता जिसका नियंत्रण गुदा अवरोधनी द्वारा क्या जाता है.
अमीबा में पोषण- हमारे शरीर में वहन रुधिर द्वारा किया जाता है। रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक है। तथा रुधिर में एक तरल माध्यम होता है, जिसे प्लैज्मा कहते हैं। प्लैज्मा भोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का वहन करता है। तथा ऑक्सीजन का वहन लाल रुधिर कणिकाओं द्वारा किया जाता है। अत: इन सब के वहन के लिए एक पंपनयंत्र की आवश्यकता होती है।
हमारा पंप-हृदय- हृदय एक पेशीय अंग है। जो मुट्ठी के आकार का होता है।हमारा हृदय चार कोष्ठों में बंटा होता है। ताकि ऑक्सीजनित रुधिर विऑक्सीजनित में न मिल सके।  रुधिर को फेफड़ों में ऑक्सीजन को जोड़ना होता है। और कार्बन डाई ऑक्साइड को हटाना होता है। जब रुधिर फेफड़ों से अपने साथ ऑक्सीजन को जोड़ता है अथवा ऑक्सीजनित होता है तो यह हृदय के बायें आलिन्द में एकत्र होता है। इस दौरान यह शिथिल हो जाता है, तथा बायाँ आलिन्द संकुचित रहता है। इसके पश्चात एकत्र ऑक्सीजनित रुधिर बांयें आलिन्द से बांयें निलय मे प्रवेश करता है। इस दौरान बायाँ आलिन्द संकुचित हो जाता है तथा बायाँ निलय शिथिल हो जाता है। बांयें निलय की भित्ती मोटी होती है। जब यह संकुचित होता है तो ऑक्सीजनित रुधिर शरीर के सम्पूर्ण अंग तंत्रो तक पहुँच जाता है। इस प्रकार हमारा हृदय एक पंप की तरह कार्य करता है।
      हृदय से रुधिर जिन वाहिनियों से होते हुए विभिन्न अंग तंत्रों तक पहुँचता है, उन्हें धमनी कहते है। इनकी भित्ती भी मजबूत व लचीली होती है। क्योंकि रुधिर दाब से अधिक होने से फटने का डर होता है। विऑक्सीजनित (कार्बन डाइ ऑक्साइड युक्त रुधिर) रुधिर को विभिन्‍न अंग तंत्रो से जो रुधिर वाहिनियाँ वापस हृदय तक लाती हैं, उन्हें शिरा कहते हैं विऑक्सीजनित रुधिर विभिन्‍न अंग तंत्रों से आकर दायाँ आलिन्द में व दायाँ आलिन्द से दायाँ निलय में प्रवेश करता है। तथा दायाँ निलय से फेफड़ो में प्रवेश करता है। यहाँ से पुन: ऑक्सीजन रुधिर से जुड़ता है और वही चक्र पुन: शुरू हो जाता है। आपने देखा होगा कि विऑक्सीजनित रुधिर को ऑक्सीजनित होने के लिए दो बार हृदय से गुजरना पड़ा है। इसलिए इस तंत्र को दोहरापरिसंचरण तंत्र कहा जाता है।
प्लेटलैट्स द्वारा अनुरक्षण- प्लेटलेट्स हमारे पूरे शरीर में भ्रमण करती हैं, जब हम घायल हो जाते हैं तो रुधिर वाहिनियों के फटने से रुधिर स्राव होता है। इससे रुधिर की हानि होती है। तथा पंम्पिग दाब में कमी आती है। प्लैटलैट्स रुधिर स्रावित स्थान पर जाल बना लेती हैं। जिससे रुधिर का थक्का बन जाता है। और रूधिर का स्रावण रुक जाता है। तथा आक्रमण करने वाले रोगाणुओं को नष्ट कर अनुरक्षण का कार्य भी करती हैं। धीरे-धीरे घाव भर जाता है।
उत्सर्जन- वह जैव प्रक्रम जिसमें अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन होता है, उत्सर्जन कहलाता है।
मानव में उत्सर्जन- मानव के उत्सर्जन तंत्र में एक जोड़ी वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग होता है। वृक्क उदर में रीढ़ की हड्डी के दोनों और होते हैं। रुधिर में से छनित नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ जैसे यूरिक अम्ल वृक्क में रुधिर से अलग कर लिए जाते हैं। इसके लिए पतली परत के रुप में कोशिकाओं का गुच्छा होता है जो अपशिष्ट पदार्थों को छान लेती हैं। छनित द्रव अपशिष्ट पदार्थ वृक्क से मूत्रवाहिनी में आते हैं। जो मूत्राशय में खुलती है। यहां एकत्र होकर मूत्र मार्ग द्वारा शरीर से बाहर त्याग दिए जाते हैं।
कृत्रिम वृक्क अपोहन -उत्तरजीवित के लिए वृक्क एक महत्वपूर्ण अंग है। यह संक्रमण, आघात या वृक्क में सीमित रुधिर प्रवाह के कारण अनियंत्रित हो सकता है जिससे इसकी कार्य क्षमता में कमी आ जाती है, और शरीर में विषैले अपशिष्ट को संचित करने लग जाता है। जो मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इस स्थिति में कृत्रिम वृक्क का उपयोग कर सकते हैं। एक कृत्रिम वृक्क नाइट्रोजनी अपशिष्टों को रुधिर से अपोहन द्वारा निकलने का कार्य करता है। इस प्रकार मृत्यु से बचा जा सकता है।
वृकाणु (नेफ्रॉन)- नेफ्रॉन उत्सर्जन तंत्र की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई होती है। मनुष्य के प्रत्येक वृक्क में लगभग दस लाख अतिसूक्ष्म नलिकाएं होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। प्रत्येक नेफ्रॉन का प्रारम्भिक भाग प्याले के समान होता है। जिसे बोमेन सम्पुट कहते हैं। इस बोमेन सम्पुट के प्यालेनुमा भाग में रक्त नलिकाओं का जाल पाया जाता है। जिसे ग्लोमेरूलस कहते हैं।बोमेन सम्पुट व ग्लोमेरूलस दोनों मिलकर मैलपीगी कोश बनाते हैं। नेफ्रॉन का शेष भाग एक लंबी नलिका के रूप में होता है। वृक्क नलिकाएं आपस में संयोग करके संग्रह वाहिनियों में खुलती हैं। वृक्क की सभी संग्रह वाहिनियां अपनी ओर की मूत्रवाहिनियों में खुलती हैं। प्रत्येक मूत्र वाहिनी का अग्र भाग कीप की तरह चौड़ा होता हैं। जिसे पेल्विस कहते हैं। जबकि मूत्रवाहिनी का पिछला भाग लम्बी नलिका के रूप में होता है जो मूत्राशय में खुलता है।

पाठ 1 रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण पढने के लिए यहाँ क्लिक करें. 

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी, ऑनलाइन मोड़ में कराएगा विद्यार्थियों को तैयारी.

रेखा डोभाल, विज्ञान शिक्षिका, सरस्वती  विद्या मंदिरइंटर कॉलेज नई टिहरी नगर उताराखंड
     प्रिय पाठकों, पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस नामक अदृश्य दुश्मन से जूझ रही है और हम इस महासंकट से निपटने के लिए घरों में लॉकडाउन के दौर से गुजर रहे हैं. लॉकडाउन  से सबकुछ ठहर गया है और इसका बच्‍चों की पढ़ाई पर भी खासा असर पड़ रहा है. बच्चों की पढाई के साथ ही शैक्षिक सत्र के  भी काफी पिछड़ जाने की आशंका बन रही है. आशा है की आप घरों में रहते हुए पढ़ाई कर समय का सदपयोग कर रहे होंगे. लॉकडाउन के कारण सभी स्कूल-कॉलेज बंद हैं. इस दौरान  आप ऑनलाइन और वर्चुअल क्‍लासेज के माध्यम से पढ़ाई करते हुए अपनी विषयगत दक्षताओं को बढ़ा सकते हैं. इस पेज के माध्यम से कक्षा दस के विद्यार्थियों के लिए रसायन विज्ञान से सम्बन्धित नोट्स प्रस्तुत कर रही हूँ. आशा करती हूँ की मेरा यह प्रयास अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सावित होगा. 

पाठ 1 रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण
रासायनिक अभिक्रियाएं-
रासायनिक अभिक्रियाएं वे प्रक्रियाएं है जिनमें नये गुणधर्मों के साथ नये पदार्थों का निर्माण होता है। किसी अभिक्रिया को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है कि बायें ओर अभिकारक तथा दायें ओर उत्पाद व मध्य में तीर का निशान लगा दिया जाता है। अभिकारकों व उत्पादों में योग (+) का चिह्न लगाया जाता है। वे पदार्थ जो अभिक्रिया में भाग लेते हैं, अभिकारक कहलाते हैं वे पदार्थ जो अभिक्रिया में नये बनते हैं, उत्पाद कहलाते हैं। जैसे: मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड 
यह समीकरण शब्द समीकरण है किसी भी अभिक्रिया को शब्द समीकरण के रूप में लिखना लम्बा हो जाता है। इसलिए रासायनिक अभिक्रिया को शब्दों के रूप में व्यक्त न करके रासायनिक सूत्र के रूप में व्यक्त किया जाता है। जिसे रासायनिक समीकरण कहते हैं।
2-संतुलित रासायनिक समीकरण-
संतुलित रासायनिक समीकरण में तीर के निशान के दोनों ओर प्रत्येक  तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है। कंकाली समीकरण को संतुलित करना आवश्यक होता है। क्योंकि द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है ना ही विनाश होता है।अभिक्रिया में दोनों ओर परमाणुओं की संख्या समान होने पर उनका द्रव्यमान भी समान होता है। इसलिए रासायनिक समीकरण को संतुलित करना भी आवश्यक होता है।  समीकरण को संतुलित करने के लिए सर्वप्रथम जिस परमाणु की संख्या सर्वाधिक होती है उसे बराबर करते हैं इसके पश्चात् अन्य की संख्या को बराबर करते हैं।
3- रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार- रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्य रूप से सात प्रकार की होती हैं जो निम्न हैं.
1. संयोजन अभिक्रिया
2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया
3. विस्थापन अभिक्रिया
4. द्विविस्थापन अभिक्रिया
5. उपचयन एवं अपचयन
6. उष्माक्षेपी अभिक्रिया 
7. उष्माशोषी अभिक्रिया
1-संयोजन अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक (पदार्थ) जुड़कर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं। संयोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इस अभिक्रिया में ठोस कैल्शियम ऑक्साइड व जल का अणु जुड़कर एकल उत्पाद कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का निर्माण कर रहे है। कैल्शियम ऑक्साइड बिना बुझा हुआ चूना होता है। जिसका उपयोग दीवारों की सफेदी करने में किया जाता है।उपरोक्त रासायनिक अभिक्रिया में निर्मित कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड को दीवारों पर सफेदी करने के दो या तीन दिन बाद तक यह CO2 से धीमी गति से क्रिया कर कैल्शियम कार्बोनेट का निर्माण करता है जिसे संगमरमर भी कहते हैं।
2-वियोजन या अपघटन अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एकल अभिकारक (यौगिक) टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है, वियोजन या अपघटन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। वियोजन अभिक्रिया में उष्मा का अवशोषण होता है इसलिए इन्हें उष्माशोषी अभिक्रिया भी कहा जाता है। इसके तीन रूप होते हैं 
1. उष्मा 
2. तापन
3. विद्युत्धारा
3. विस्थापन अभिक्रिया
वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक तत्व दूसरे तत्व को उसके यौगिक से अलग कर देता है, विस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। जैसे: - लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में ले जाने पर कील का रंग भूरा हो जाता हे तथा कॉपर सल्फेट के विलयन का रंग नीला मलीन हो जाता है। क्योंकी लोहा(आयरन), कॉपर को उसके विलयन से पृथक कर देता है।
4. द्विविस्थापन अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें क्रिया कारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है व सभी अभिक्रियाएँ द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इस अभिक्रिया में Ba2+ तथा (SO4) 2-  आयनों की क्रिया से BaSO4 के अवक्षेप का निर्माण होता है।
5. उपचयन एवं अपचयन- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकारक का उपचयन व दूसरे अभिकारक का अपचयन होता है वे अभिक्रियाएँ उपचयन - अपचयन (रेडॉक्स) अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
अभिकारक में ऑक्सीजन का जुड़ना अथवा हाइड्रोजन का निकलना उपचयन तथा ऑक्सीजन का निकलना अथवा हाइड्रोजन का जुड़ना अपचयन कहलाता है।जैसे:- इस रासायनिक अभिक्रिया का तापन कराने पर कॉपर का अपचयन व हाइड्रोजन का उपचयन हो जाता है।
6. उष्माक्षेपी अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ उष्मा का भी उत्सर्जन होता है वे सभी अभिक्रियाएँ उष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। जैसे प्राकृतिक गैस का दहन
7. उष्माशोषी अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें उष्मा का अवशोषण होता है वे सभी अभिक्रियाएँ उष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। सभी अपघटन अभिक्रियाएं ऊष्माक्षेपी होती है।
1. संक्षारण- जब कोई धातु अम्ल, क्षार, नमी आदि के संपर्क में आती हे तो वह नष्ट होने लगती हे जिसे संक्षारण कहते हैं। संक्षारण के कारण चाँदी के ऊपर काली परत व ताँबे के ऊपर हरे रंग की परत चढ़ जाती है। संक्षारण के कारण ही पुल, लोहे की रेलिंग, जहाज, धातु, विशेषकर लोहे से बनी वस्तुएं नष्ट हो जाती हैं। जिसका मुख्य कारण उपचयन अभिक्रिया है। संक्षारण को पैंट करके रोका जा सकता है।
2. विकृतगंधिता- वसायुक्त अथवा तैलिय खाद्य सामग्री जब लंबे समय तक रखे रह जाते हैं तो इनका उपचयन हो जाता है जिसके कारण इनका स्वाद एवं गंध बदल जाती हैं तथा ये विकृतगंधी हो जाती हैं, इसके प्रभाव को रोकने के लिए खाद्य सामग्री को वायुरोधी बर्तनों में रखा जाता है। चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली में से ऑक्सीजन निकालकर नाइट्रोजन जैसी कम सक्रिय गैस भर देते हैं ताकि उनका उपचयन ना हो सकें.
क्रमशः

शनिवार, 4 अप्रैल 2020

कोरोना की जंग में आप भी करें प्रधानमंत्री केयर्स फंड में अपना योगदान। ऐसे भेजे अपना अंशदान, मिलेगी 100 फीसदी कर छूट।

   
   प्रिय पाठकों, पूरी दुनिया के साथ भारत भी इस वक्त कोरोना वायरस से पैदा हुयी महामारी के संकट से जूझ रहा है। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2800 तक पहुंच गई है। इस वैश्विक आपदा से निपटने के लिए मोदी सरकार द्वारा चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड (PM CARES Fund) बनाया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुश्किल घड़ी से निपटने के लिए देशवासियों से ज्यादा से ज्यादा दान करने की अपील की है। पीएम मोदी की इस अपील का असर दिखाई दिया है कि अब तक लाखों लोगों द्वारा अपनी क्षमता के मुताबिक पीएम केयर फंड में राशि दान की है। देश के उद्योग, खेल, फिल्म सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़ी जानी मानी हस्तियों ने भी PM CARES Fund में डोनेशन दे रहे है. इसी क्रम में मैंने भी आज PM CARES Fund में अपनी क्षमता के अनुरूप अंशदान दिया है. आपसे मेरी अपील है कि वे कृपया PM-CARES फंड में अंशदान के लिए आगे आएं। इसका उपयोग आगे भी इस तरह की किसी भी आपदा की स्थिति में किया जा सकता है।
     सरकार ने कोरोना वायरस संकट से निपटने को पीएम-केयर फंड में चंदे पर आयकर में सौ फीसद कटौती की घोषणा को अध्यादेश के जरिए कानूनी रूप भी दे दिया है। इस अध्यादेश के जरिए पीएम केयर्स फंड में दिए गए योगदान पर भी उसी तरह 100 प्रतिशत की कर छूट देने का प्रावधान किया गया है, जैसी छूट प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष में योगदान देने पर मिलती है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ''इस लिहाज से पीएम केयर्स फंड में किये गए दान पर आयकर कानून की धारा 80जी के तहत 100 प्रतिशत कर कटौती होगी। पीएम केयर्स फंड में दिए गए दान पर सकल आय की 10 प्रतिशत कटौती की सीमा भी लागू नहीं होगी। अध्यादेश जारी होने के बाद वित्त वर्ष 2018- 19 की आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून करने और पैन के साथ आधार पहचान संख्या को जोड़ने की अंतिम तिथि को भी तीन माह के लिए 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। आयकर कानून अध्याय छह ए-बी के तहत धारा 80सी, 80डी, 80जी जिनके तहत क्रमश: बीमा पॉलिसी, पीपीएफ, राष्ट्रीय बचत पत्र आदि, चिकित्सा बीमा प्रीमियम और दान आदि में किये गए निवेश, भुगतान पर कर कटौती दी जाती है ऐसे निवेशों के लिए भी समयसीमा को 30 जून 2020 तक बढ़ाया गया है। यानी 2019- 20 के दौरानल कर छूट पाने के लिए इनमें अब निवेश 30 जून तक किया जा सकेगा।  अध्यादेश के जरिए मार्च, अप्रैल और मई में दी जाने वाली केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की रिटर्न को भी अब 30 जून 2020 तक भरा जा सकेगा।

PM CARES Fund में ऐसे कर सकते हैं डोनेशन

देश का कोई भी नागरिक और संस्थाएं वेबसाइट pmindia.gov.in पर जा सकते हैं और पीएम केयर्स फंड में दान कर सकते हैं. इसके लिए जानकारी इस प्रकार है:

अकाउंट का नाम: PM CARES
अकाउंट नंबर: 2121PM20202
IFSC कोड: SBIN0000691
SWIFT कोड : SBININBB104
बैंक और ब्रांच का नाम: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नई दिल्ली मेन ब्रांच
UPI ID : pmcares@sbi

ऑनलाइन भी कर सकते हैं डोनेशन

इसके अलावा फंड में डोनेशन करने के लिए pmindia.gov.in वेबसाइट पर जाकर
डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप वहां इंटरननेट बैंकिंग, UPI ( Amazon Pay, Google Pay, PayTM, BHIM, PhonePe,Mobikwik आदि ) के जरिए भुगतान कर सकते हैं. इसके अलावा भुगतान के लिए RTGS और NEFT का भी माध्यम उपलब्ध है। इस डोनेशन को सेक्शन 80(G) के तहत इनकम टैक्स से छूट भी मिलेगी।

ये हैं बड़े दानवीर

देश भर में हवाई अड्डों का परिचालन करने वाली सरकारी कंपनी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और उसके कर्मचारियों ने कोरोना वायरस 'कोविड-19' से लड़ने के लिए 35 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
जेएसडब्ल्यू ग्रुप ने 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है
बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार ने शनिवार को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में 25 करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा की।
सुपरस्टार रजनीकांत ने सबसे पहले 50 लाख रुपये दिहाड़ी मजदूरों के लिए दान दिए थे। दक्षिण के अन्य अभिनेताओं में प्रभास, महेश बाबू, पवन कल्याण, राम चरण समेत कई अन्य अभिनेताओं ने भी दान दिए हैं।
पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने शनिवार को 52 लाख रुपये (31 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष और 21 लाख रुपये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आपदा राहत कोष को) कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिये दान दिया।
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने शुक्रवार को इस महामारी से लड़ने के लिए 50 लाख रुपये दिए थे। 50 लाख रुपये दिए कपिल ने प्रधानमंत्री राहत कोष में
कॉरपोरेट दिलेरी का एक सबसे बड़ा नमूना पेश करते हुए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने शनिवार को कोविड-19 से लड़ाई के लिए संयुक्त रूप से 1,500 करोड़ रुपये की घोषणा की।
टाटा ट्रस्ट ने 500 करोड़ रुपये की घोषणा की, वहीं टाटा संस ने कोविड-19 और उससे संबंधित राहत गतिविधियों के लिए अतिरिक्त 1000 करोड़ रुपये की घोषणा की।
खेलमंत्री किरेन रिजिजू ने देश को कोरोना वायरस प्रकोप के खिलाफ लड़ने के लिए एक करोड़ रुपये का दान दिया है।
केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने शनिवार को अपनी सांसद निधि से एक करोड़ रुपये और एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में देने का ऐलान किया है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. रमण ने शनिवार को प्रधानमंत्री राहत कोष समेत अनेक राहत कोषों में तीन लाख रुपये देने की घोषणा की है।
ईपीएस (इंप्लॉइज पेंशन स्कीम)-95 के पेंशनधारकों ने कोरोनावायरस की महामारी से निपटने के लिए अपनी एक दिन की पेंशन को स्वैच्छिक रूप से सरकारी खजाने में जमा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
भाजपा की पश्चिम बंगाल की सांसद लॉकेट चटर्जी ने कोरोना वायरस महामारी के राहत कार्यों के लिए अपने एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में दान करने का निर्णय लिया है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस को रोकने और उसका निदान तलाशने के लिए किए जा रहे उपायों में अपनी सांसद निधि से एक करोड़ रुपये का योगदान किया है।
वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कोविड- 19 के खिलाफ जारी लड़ाई में अपनी स्थानीय क्षेत्र विकास सांसद निधि से एक करोड़ रुपये के योगदान की जानकारी दी है।
जम्मू-कश्मीर से भाजपा के तीन सांसदों और पूर्व विधायकों ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में अपना एक महीने का वेतन देने का फैसला किया है।
देश की सबसे धनवान खेल संस्था भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 51 करोड़ रुपये देने की घोषणा शनिवार को की। बोर्ड के अध्यक्ष सौरव गांगुली, मानद सचिव जय शाह और बोर्ड के पदाधिकारियों ने राजय एसोसिएशनों के साथ शनिवार को इस आशय की घोषणा की।
कवि कुमार विश्वास ने पीएम केयर्स फंड में पांच लाख रुपये दिए हैं।
कोरोना के खिलाफ जंग में ये भी आए आगे
मुकेश अंबानी, चेयरमैन, रिलायंस इंडस्ट्रीजः महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 करोड़ रुपए दिए। रिलायंस फाउंडेशन ने बीएमसी के साथ मिलकर मुंबई के सेवन हिल्स हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए 100 बेड का सेंटर बनाया है। महाराष्ट्र के लोधीवली में आइसोलेशन सेंटर भी बनाया है।
 अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता रिसोर्सेजः कोरोनावायरस से लड़ने के लिए 100 करोड़ रुपए की मदद का ऐलान किया है।
आनंद महिंद्रा, चेयरमैन, महिंद्रा ग्रुपः महिंद्रा ग्रुप अपनी यूनिट्स में वेंटिलेटर बनाएगा, ताकि कोरोना के मामले बढ़ने पर देश में वेंटीलेटर की कमी न हो। महिंद्रा ने अपनी हॉलीडे कंपनी क्लब महिंद्रा को भी मरीजों की देखभाल के लिए खोलने का प्रपोजल दिया है। महिंद्रा अपनी 100% सैलरी कोविड-19 फंड में देंगे। यह फंड छोटी इंडस्ट्री और डेली वेजेज पर काम करने वाले लोगों की मदद के लिए बनाया गया है।
पंकज एम मुंजाल, चेयरमैन, हीरो साइकल्सः कोरोनावायरस से निपटने के लिए कंपनी के इमरजेंसी फंड में से 100 करोड़ रुपए देंगे।
बजाज ग्रुपः हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने, खाने और रहने के इंतजाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है।
विजय शेखर शर्मा, फाउंडर-सीईओ, पेटीएमः पेटीएम वेंटिलेटर और दूसरे जरूरी सामान बनाने वालों को 5 करोड़ रुपए की मदद करेगी।
सन फार्माः 25 करोड़ रुपए की दवाएं और सैनिटाइजर दान करेगी।
पारलेः कंपनी अगले तीन हफ्ते में बिस्किट के 3 करोड़ पैकेट बांटेगी।
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शनिवार, 14 मार्च 2020

कोरोना वायरस के संभावित खतरे को लेकर उत्तराखण्ड सरकार ने दिए सख्त निर्देश। बच्चों के साथ ही अध्यापक भी नही रहेंगे 31 मार्च तक स्कूलों में उपस्थित।


कोरोना वायरस के संक्रमण के संभावित खतरे और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  उत्तराखंड सरकार ने राज्य के अंतर्गत संचालित सभी प्राइवेट स्कूलों के संचालकों के लिए निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों में केवल कक्षा 9 और 11 वीं की गृह परीक्षाओं की अनुमति दी है जबकि कक्षा आठ तक के छात्रों को पूर्व के मूल्यांकन के आधार पर प्रोन्नत करने के निर्देश दिए है। इस दौरान निजी स्कूलों में अध्यापकों को भी  उपस्थित न रखने के निर्देश दिए गए हैं।
   
    शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने निदेशक माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा को जारी आदेश में कहा है कि कोरोना वायरस का विश्वभर में प्रकोप फैलरहा है तथा इसके संभावित खतरे को देखते हुए राज्य के अंतर्गत संचालित समस्त प्राइवेट स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाय। उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशों पर 13 मार्च से 31 मार्च तक राज्य के अभी शासकीय और निजी विद्यलयो को बंद रखने के निर्देश कल शिक्षा सचिव द्वारा जारी किए  जा चुके है। किन्तु गृह परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। शिक्षा सचिव ने निजी स्कूलों में कक्षा 9 और 11 वीं की गृह परीक्षाएं आयोजित  करवाने  की अनुमति देते हुए कक्षा 8 तक पूर्व में किये गए मूल्यांकन के आधार पर छात्र छात्राओं को प्रोन्नत करने के निर्देश दिए हैं। सचिव ने कहा है कि कतिपय प्राइवेट स्कूल संचालक कक्षाएं संचालित ना होने के बावजूद भी अध्यापकों को विद्यालयों में उपस्थित रहने के लिए कर रहे हैं  जो कि उचित नही है। उन्होंने कहा है कि अध्यापकों अध्यापिकाओं को विद्यालय में उपस्थित न रखा जाए। आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की आवासीय व्यवस्था पूर्वक संचालित रखने के साथ ही निर्देश दिया गया है कि विद्यालयों में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रखा जाए और बाहर जाने वाले बच्चों को सैनिटाइजर और मास्क आदि प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। हालांकि इन विद्यालयों में भी दिन में कक्षाओं का संचालन पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

कोरोना वायरस के कहर से जूझ रही है दुनियां, चीन में 5 हजार तो इटली में 1050 से ज्यादा लोगों की हो चुकि है मौत. भारत में भी कोरोना वायरस दे चुका है दस्तक।


नई दिल्ली: चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस 122 देशों में पहुंच गया है.इसके संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या 4600 को पार कर गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है. इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दिख रहा है. भारत सहित कई देशों के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है. दुनिया भर की सरकारें इस वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने पर ध्यान दे रही हैं. जानकारों का कहना है इसके संक्रमण को फैलने से रोककर ही इसे काबू में किया जा सकता है.


भारत में संक्रमण के 73 मामले

भारत में भी कोरोना से संक्रमण के 73 मामलों की पुष्टि हो चुकी है. कोरोना ने अब तक 12 राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है. सबसे ज्यादा कोरोना के मामले केरल में आए हैं. यहां 17 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है. इसके बाद में महाराष्ट्र में 11 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है. यूपी में भी 10 कोरोना के मामले आए हैं. दिल्ली में 6 मामलों की पुष्टि हुई है.



  1. कोरोना से दुनिया भर में अब तक 4600 लोगों की मौत हो चुकी हैं.
  2. ईरान में अब तक कोरोना से 92 और दक्षिण कोरिया में 32 लोगों की मौत हो चुकी है.
  3. सियेटल में फेसबुक के एक इम्पलॉई में कोविड 19 का संक्रमण पाया गया है.
  4. सिर्फ इटली में ही अब तक कोरोना से 366 लोगों की मौत हो गयी है.
  5. चीन के हुबेई प्रांत में अब तक कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 88,466 हो गयी है.
  6. चीन के हुबेई प्रांत में अब तक कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 3200 हो गयी है.
  7. दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1,26,000 के पार चली गयी है.



कोरोना को काबू में करना बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है. हालांकि, चीन इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है. वहां नए मामलों की संख्या घटी है. हालांकि, 122 देशों में कोरोना वायरस के केस मिलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने इसे महामारी घोषित किया है.






122 देशों में पहुंचा यह वायरस

चीन से बाहर 122 देशों में कोरोना वायरस के मामलों की पुष्टि हुई है. इन देशों में थाईलैंड, ईरान, इटली, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. आइए जानते हैं कि इस वायरस के लक्षण और बचाव के तरीके क्या हैं.



  1. क्या है कोरोना वायरस?
    कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है.
  2. क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
    इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है. यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था.
  3. क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
    स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.



चीन में सबसे ज्यादा असर

चीन में इस वायरस का बहुत ज्यादा असर पड़ा है. सबसे ज्यादा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है. लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा बना था. 2002-03 में सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. पूरी दुनिया में हजारों लोग इससे संक्रमित हुए थे. इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा था.



इनसान के बाल से 900 गुना छोटा है कोरोना

क्या आप जानते हैं कि कोरोना वायरस बहुत सूक्ष्म लेकिन प्रभावी वायरस है. कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है. आकार में इस छोटे वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. इसका खौफ आज दुनियाभर में दिख रहा है.






इटली में स्कूल और कॉलेज 15 मार्च तक बंद

इटली में कोरोना वायरस से 366 मरीजों की मौत से लोगों और प्रशासन में दहशत है. इटली की सरकार ने सभी स्कूल और विश्वविद्यालय को 15 मार्च तक के लिए बंद कर दिया है. इसकी वजह लोगों को भीड़ भाड़ वाली जगह पर जुटने से रोकना है.



पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा रद्द

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भी शेख मुजीब उर रहमान की जयंती का शताब्दी समारोह रद्द कर दिया है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह के मुख्य वक्ता थे और ऐसे में उनका बांग्लादेश दौरा रद हो गया है.

बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

9वीं में अध्ययनरत स्कूली बच्चों को इसरो का बुलावा, यंग साइंटिस्ट बनने के लिए करना होगा ऑनलाइन आवेदन.

रेखा डोभाल
प्रिय विद्यार्थियों इस पोस्ट के माध्यम से आपको भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वकांक्षी कार्यक्रम ''युविका 2020'' के बारे में बताने जा रही हूँ. यदि आप विज्ञान और विशेषरूप से अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में रुचि रखते हैं तो यह कार्यक्रम आपके सपनो को साकार कर  सकता है. इसरो ने कक्षा 9 में अध्ययनरत ऐसे बच्चों से यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम के लिए आवेदन मांगे हैं जो विज्ञान में रुचि रखने के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में जिले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं.
     जी हाँ, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्कूली छात्रों को अंतरिक्ष की जानकारी और उसकी टेकनोलॉजी समझने के लिए यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम का दूसरा संस्करण शुरू कर दिया है।  इसरो के युवा विज्ञानी कार्यक्रम (युविका) 2020 के लिए 24 फरवरी, 2020 तक www.isro.gov.in पर आवेदन किए जा सकते हैं। यह कार्यक्रम गर्मियों के छुट्टियों के दौरान दो सप्ताह 11 मई से 22 मई 2020 तक चलेगा। आपको बताना चाहूँगा की  इसरो का ''युविका कार्यक्रम'' 2019 में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद बच्चों को स्पेस टक्नोलॉजी, स्पेस साइंस जैसी चीजों के बारे में जागरूक करना है।
योग्यता
जिन स्टूडेंट्स ने आठवीं की परीक्षा पास कर ली है और नौवीं में पढ़ाई कर रहे हैं, वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सीबीएसई, आईसीएसई और राज्‍य पाठ्यक्रम को मिलाकर हर राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश से तीन विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। देश भर से प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) अभ्यर्थियों के लिए पांच अन्य सीटें आरक्षित हैं।
चयन
उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए किया जाएगा। इसके लिए 24 फरवरी तक ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया चलेगी। 8वीं के प्राप्त मार्क्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में प्रदर्शन के आधार स्टूडेंट्स का चयन होगा।

कब से होंगे आवेदन, कब प्रशिक्षण

  • आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इसरो युवा विज्ञानी कार्यक्रम 2020 के लिए आवेदन की प्रक्रिया 3 फरवरी 2020 से शुरू हो रही है। विद्यार्थियों के पास 24 फरवरी 2020 तक आवेदन करने का अवसर है।
  • चयनित छात्र-छात्राओं की प्रोविजनल मेरिट सूची 2 मार्च 2020 तक जारी कर दी जाएगी। इसके बाद उन्हें बताए गए दस्तावेजों की प्रतियां 23 मार्च 2020 तक या अपलोड करनी होंगी।
  • चयनित छात्र-छात्राओं की अंतिम सूची मार्च के अंत तक जारी कर दी जाएगी।
  • युवा विज्ञानी कार्यक्रम 2020 का आयोजन 11 मई से 22 मई 2020 तक किया जाएगा।
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