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सोशल मीडिया में पिछले लंबे समय से एक मैसेज वायरल हो रहा
है। इसमें दावा किया जा रहा है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय को शासकीय
करने की प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा की जा चुकी है। यह खबर सोसल मीडिया के माध्यम से देशभर में वायरल हो रही है. इससे विद्याभारती के शिशु मंदिरों और विद्या मंदिरों के शिक्षकों में शासकीय सेवा में लिए जाने को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, किन्तु सच यह है कि यह फर्जी खबर है। सरकार ने न तो ऐसी कोई घोषणा की है और न ही कोई ऐसा
संदेश किसी नेता के माध्यम से वास्तव में दिया गया है।
क्या वायरल
- सोशल मीडिया पर यह जी टीवी न्यूज चैनल का फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार कर वायरल किया जा रहा है।
- इसमें एक तरफ पीएम मोदी की फोटो लगी है। दूसरी तरफ लिखा है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय को शासकीय करने की घोषणा।
- 5 वर्ष सेवा दे चुके शिक्षक होंगे नियमित और नीचे लिखा है, सभी राज्यों में 15 अगस्त से लागू।
- ये स्क्रीन शॉट सबसे पहले 26 जुलाई 2017 को http://rajmediachargesheet.com/index.php/2017/07/26/raj-media-1038/ नाम की वेबसाइट की लिंक पर पोस्ट की गई थी और उसके बाद से सोशल मीडिया में कई बार वायरल हो गई।
क्या है सच्चाई
- देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन द्वारा सभी सरस्वती शिशु मंदिर संचालित किए जाते हैं। आरएसएस में भी स्कूलों का एक अलग विभाग 'अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान' है। अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के विद्या भारती द्वारा यह स्कूल संचालित किए जाते हैं।
- इन स्कूलों के संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक समितियां गठित हैं। स्कूलों को बोर्ड से संबद्धता लेना होती है। इसमें राज्य के बोर्ड के साथ ही सीबीएसई की संबद्धता के साथ भी बहुत से सरस्वती शिशु मंदिर संचालित होते हैं।
- इस खबर की पुष्टि के लिए एक राष्ट्रिय स्तर के समाचार पत्र से जुड़े संवाददाता ने विद्या भारती की सेंट्रल एग्ज्युकेटिव कमेटी में उपाध्यक्ष डॉ रमा मिश्रा से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरस्वती मंदिर विद्यालयों को सरकारी करने की कोई जानकारी हमें नहीं है। सरकार की तरफ से हमें ऐसी कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। भारत सरकार मानव संसाधन मंत्रालय के सूत्रों ने भी ऐसी किसी घोषणा या योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
- कुल मिलाकर वायरल किया जा रहा जी टीवी न्यूज का स्क्रीनशॉट फर्जी है और स्पष्ट रूप से इसे एडिट करके बनाया गया है क्योंकि इमेज में एकरूपता नहीं है और काली स्क्रीन पर अलग से पेस्ट किया संदेश साफ समझ आ रहा है।
- वास्तव में ये स्क्रीन शॉट नोटबंदी के समय पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से उठाया गया है और उसे एडिट करके ब्लैक स्क्रीन में शिशु मंदिर को शासकीय करने का संदेश चिपका दिया गया है जो कि बिलकुल झूठ है।
- इस स्क्रीन शॉट का एक और फेक न्यूज में भी इस्तेमाल किया गया था जिसमें
मैसेज में से शून्य हटाकर 500 की जगह 50 और 1000 की जगह 100 के नोट को बंद
करने की फेक खबर पीएम मोदी के नाम से वायरल की गई थी। देखें वही
स्क्रीनशॉटयहाँ पर भी है.
1952 में खुला था पहला शिशु मंदिर
- भारतीय जन संघ के नेता नानाजी देशमुख ने 1952 में पहला सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर में शुरू किया था। छोटी से इमारत में 5 रुपए किराये पर यह स्कूल शुरू किया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे इसकी शाखाएं देशभर में खोली गईं। यहां की परंपराएं भी हिंदू संस्कृति संवाहक होती हैं।
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